ओ हरिया, तू हर ले आकर

यूँ तो हरण किया है सब कुछ
सुंदर रूप दिखाकर
ओ हरिया, तू हर ले आकर

कलुष लिया हर मन का
जैसे चुपके-चुपके आकर
स्वयं को श्याम बनाया तू ने
मुझको गौर बनाकर
ओ हरिया, तू हर ले आकर

कहाँ गया तू लेकर मेरे
प्राण-पखेरू उड़ाकर
सब कहते हैं, “मिलता है तू
अन्तकाल में आकर”,
ओ हरिया, तू हर ले आकर

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