अबकी बार न आकर जाओ

युग-युग से हूँ नयन पसारे
पास नयन के आओ
अबकी बार न आकर जाओ

मन के यमुना-तट पर आकर
राधा मुझे बनाओ
बहुत चराया गोकुल में तू
अब न श्याम चराओ
अबकी बार न आकर जाओ

नज़र न आये बाहर से आ
प्राणों में बस जाओ
सब कहते हैं, “तू कर्त्ता है”,
माध्यम मुझे बनाओ
अबकी बार न आकर जाओ

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