देख चरणचिह्न सब बोलीं

श्याम गया है इसी राह से
कहकर पीछे हो ली
देख चरणचिह्न सब बोलीं

सब करती चर्चा आपस में
कहाँ गयी वह टोली
याद सबों को ऐसी आयी
विगत दिनों की होली
देख चरणचिह्न सब बोलीं

गोकुल से अर्थी निकलेगी
नहीं उठेगी डोली
सब कहते हैं, “कहाँ मिलेगा
अब वैसा हमजोली”,
देख चरणचिह्न सब बोलीं

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