मैं तेरी पूजा करती हूँ

वंशी पर चलती है उँगली
होंठों पर रहती हूँ
मैं तेरी पूजा करती हूँ

पर सदा मैं तेरे नाम के
आगे ही रहती हूँ
बनकर स्वर-लहरी मैं तेरे
संग-संग बहती हूँ
मैं तेरी पूजा करती हूँ

तू श्याम, कभी काली बनकर
आता है, कहती हूँ
सब कहते हैं, “राधामोहन”,
मैं सबकी सहती हूँ
मैं तेरी पूजा करती हूँ

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