बिन श्यामा के श्याम अधूरे

नाचे न तुम पर कोई श्याम
जैसा चाहे तू रे
बिन श्यामा के श्याम अधूरे

अपनी राधा को तू अपने
अधरों से आ छू रे
हृदय, मधुर-वंशी के स्वर में
मैं अपना घोलूँ रे
बिन श्यामा के श्याम अधूरे

नाचे राधिका ऐसे कि तू
हो जाये हाँ, पूरे
सब कहते, “कनु ढूँढ़ रहा है”,
क्या खोया है तू रे
बिन श्यामा के श्याम अधूरे

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