तरु पर मोहित हुईं लतायें

श्याम तरु से टेक लगाकर
बंशी मधुर बजाये
तरु पर मोहित हुईं लतायें

री, सखियों के भाग्य से भी
मानो भली लतायें
प्रीतम के वक्ष पर जैसे
हो लोट रहीं ललनायें
तरु पर मोहित हुईं लतायें

पूछ रही हैं वृन्दावन में
राज कोई बताये
सब कहते हैं, “वासुदेव को
पीपल-तरु ही भाये”,
तरु पर मोहित हुईं लतायें

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