नयन श्याम-अंजन से भर दे

देख सकूँ मैं छवि तुम्हारी
क्षणिक कृपा तू कर दे
नयन श्याम-अंजन से भर दे

फिर नयन की ज्योति चाहे
हाँ, क्षीण भले ही कर दे
परत पड़ी हैं आँखों पर जो
दूर उसे तू कर दे
नयन श्याम-अंजन से भर दे

सुनकर तेरी चर्चा, राधा
चली है अपने घर से
सब कहते हैं, “तू मिलता है
जो भजता है उर से”
नयन श्याम-अंजन से भर दे

Leave a Reply