ओ नटखट, हट जाने दे

भींग गई हाँ, मेरी चुनरिया
झट-पट घर जाने दे
ओ नटखट, हट जाने दे

छोड़ मेरी किस्मत पर जा तू
मुझको पछताने दे
पंथ रोके खड़ा है क्यों रे
पग उरे बढ़ाने दे
ओ नटखट, हट जाने दे

पंथ निहारे माता मेरी
ओ कान्हा, जाने दे
सांझ हुई घर जाकर अब तो
सांध्य-दीप जलाने दे
ओ नटखट, हट जाने दे

विरह की अग्नि में जल-जलकर
तन-मन गँवाने दे
सदा भाव में यूँ ही अब
तो एक जनम जाने दे
ओ नटखट, हट जाने दे

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