ओ री सखि, मैं हुई साँवरी

आड़ में आते घनश्याम की,
ऐसी पड़ी छाँव री
ओ री सखि, मैं हुई साँवरी

ओ हरिया, सब सखियाँ बोलीं
“राधा हुई बाँवरी”
बीच भँवर में जीवन की
अब हाय, डूबी नाव री
ओ री सखि, मैं हुई साँवरी

बेहाल हुई सुन दूर-दूर
ढूँढ़े गाँव – गाँव री
सब कहते, “मुरलीवाले के –
पीछे गयी साँवरी”,
ओ री सखि, मैं हुई साँवरी

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