गागर तोड़त बाज न आया

अब करते हो आनाकानी
पहले ख्याल न आया
गागर तोड़त बाज न आया

चली थी लेकर गगरिया तू
आगे-पीछे आया
यूँ कर के तू हाल-बेहाल
देख-देख मुस्काया
गागर तोड़त बाज न आया

प्राण गया ले हर के मेरे
ठूँठ रही ज्यों काया
मैं न छोड़ूँगी, ओ नटखट!
यमुना तट क्यों आया
गागर तोड़त बाज न आया

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