सखि, रंग दी उसने चुनरिया

श्याम ने ऐसे गगरी तोड़ी
कि लचक गयी कमरिया
सखि, रंग दी उसने चुनरिया

अब कैसे मैं जाऊँ घर को
भूली हाय, डगरिया
लोक-लाज सब तज के आयी
ऐसी उठी लहरिया
सखि, रंग दी उसने चुनरिया

अच्छी-खासी, भोली-भाली
आज हुई बावरिया
सांच कहूँ, सखी झूठ माने
सबकी फिरी नजरिया
सखि, रंग दी उसने चुनरिया

अपने रंग में रंगकर हाय
कर दी श्याम चुनरिया
सखि, रंग दी उसने चुनरिया

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