मुझे ले लो अपनी शरण में

तू मेरी चौखट पर बैठा
मैं बैठा हूँ घर में
मुझे ले लो अपनी शरण में

गिरती-पड़ती साँसें चलतीं
जैसे नाव भँवर में
तेरे दर्शन की ख़ातिर, हैं
लटके प्राण अधर में
मुझे ले लो अपनी शरण में

‘हे राम!’ कहते प्राण निकले
अब श्रीरामसमर में
आज नहीं तो फिर कब होगा
मिलना निज रघुवर में
मुझे ले लो अपनी शरण में

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