सोच-सोच पग धरूँ जतन से

तेरी उलझन अच्छी है इस
दुनिया की उलझन से
सोच-सोच पग धरूँ जतन से

गली-गली कर्फ्यू लगी है
जाऊँ कैसे तन के
दूर है मंजिल लेकिन तू
नज़दीक है मन के
सोच-सोच पग धरूँ जतन से

दंगे-फसाद की दुनिया में
फंदे बहुत धरम के
सारा जीवन कर्मकाण्ड में
बीते हाय, भरम में
सोच-सोच पग धरूँ जतन से

चौंकस रहूँ हरदम साईं
सुधि हुई है जब से
तेरी उलझन अच्छी है इस
दुनिया की उलझन से
सोच-सोच पग धरूँ जतन से

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