है अदभुत प्रताप तुम्हारा

कंठ में रखूँ नाम तेरा
मन में तेरी माला
है अदभुत प्रताप तुम्हारा

कैसे कहूँ ये कैसे हुआ
मन गोरा, तन काला
बाहर-बाहर है अँधेरा
भीतर बहुत उजाला
है अदभुत प्रताप तुम्हारा

साथ न छोड़ा, तू ने मुझको
बना दिया बंजारा
छूट गया केंचुल-सा मेरे
मन का कल्मष सारा
है अदभुत प्रताप तुम्हारा

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