कि रामधन बाँटा तेरा

‘शाह’ बनाया तू ने मुझको
ऐसे दिन को फेरा
कि रामधन बाँटा तेरा

लुटा रहा जो राम दिये
हाथ पकड़कर मेरा
कि छुड़ा सकूँ न पीछा तुझसे
ऐसे मुझको घेरा
कि रामधन बाँटा तेरा

रामधन ही महाधन है
श्रीराम बिना अँधेरा
कह ‘शर्मन’ कैसा धन है
जो घटे कभी न तेरा
कि रामधन बाँटा तेरा

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