छोड़ पगले तू हेरा-फेरी

मरा-मरा जपकर ऋषि ने
रामनाम की माला फेरी
छोड़ पगले तू हेरा-फेरी

रामनाम के मंतर से ही
बदलेगी किस्मत तेरी
एक ही आस रहेगी अंत में
जब होगी रात अँधेरी
छोड़ पगले तू हेरा-फेरी

कहीं रामशरण में आते-आते
हो न जाये देरी
अज्ञानवश ही करता है तू
निशदिन पाप की ढेरी
छोड़ पगले तू हेरा-फेरी

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