जादूगरी राम की, देखी

सब कर्त्ता-धर्त्ता वही है, तू
क्यों व्यर्थ बघारे शेखी
जादूगरी राम की, देखी

कृपा रही उनकी तुम पर तो
बना रहेगा विवेकी
पार वही करता है बनकर
लाठी एक अंधे की
जादूगरी राम की, देखी

वो मुझको जाँता में पीसे
मैं कूटूं नित ढेंकी
संशय मत कर अदभुत है
यह रामनाम की रेकी
जादूगरी राम की, देखी

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