पिया, उतारो घूँघट रूख से

भर दे मेरे जीवन में तू
ज्योति-सुधा मुख से
पिया, उतारो घूँघट रूख से

उकसा दे लौ या बुझा दे
अपनी मधुर फूँक से
मिटकर मैं मिल जाऊँ
तेरे अनंत परमरूप से
पिया, उतारो घूँघट रूख से

क्षमा करो, हो जाये कोई
भूल-चूक मुझसे
भर दे मेरे जीवन में तू
ज्योति-सुधा मुख से
पिया, उतारो घूँघट रूख से

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