धूल मिली मुझको उपहार

आये मेरी सभा में भगवन
चरण दिये निज झार
धूल मिली मुझको उपहार

बंद किये दो नयन, मन का
खोल दिया एक द्वार
बिना निमंत्रण भेजे आया
बड़ा किया उपकार
धूल मिली मुझको उपहार

छवि निहारूँ निशदिन तेरी
धूल बनी आधार
जैसा भी हूँ, तेरा ही हूँ
करो मुझे स्वीकार
धूल मिली मुझको उपहार

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