सब ठाट-बाट रह जायेगा

आठ पाँव की खाट पे तू
अंतिम घाट पे जायेगा
सब ठाट-बाट रह जायेगा

काबा-काशी ये धाम कहीं
कोई न पहुँचायेगा
गंगाजल मुख में होगा, पर
तुलसी चबा न पायेगा
सब ठाट-बाट रह जायेगा

बंधा रहेगा रस्सी से कोई
गजभर क़फ़न ओढ़ायेगा
कह ‘शर्मन’ अब क्या विचारे
भज “राम-राम” तर जायेगा
सब ठाट-बाट रह जायेगा

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