मौसम का अज़ीब-सा पहर लगता है

मौसम का अज़ीब-सा पहर लगता है
कुछ बदला-बदला-सा शहर लगता है

कल-तक बाज़ार में घुमा करते थे
अब तो घर के आस-पास डर लगता है

आतंक-सा फैल गया है चारों तरफ़
बौना भी क़रीब से अज़गर लगता है

खौफ़ कुछ इस तरह दिल में समाया
कि पूजा का प्रसाद भी ज़हर लगता है

मौसम पे किसी को भरोसा न रहा
उस पर भी रिश्वत का असर लगता है

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