दिनभर जब कोई काम नहीं मिलता

दिनभर जब कोई काम नहीं मिलता
बेचकर सामान भी दाम नहीं मिलता

बेचते नहीं, तो क्या करते आखिर
मुफ्त-ही बच्चों को बादाम नहीं मिलता

हम बैठे हैं मुसीबत के घोड़े पर
कहीं इस सफर में विराम नहीं मिलता

करते हैं मशक्कत सारा दिन, फिर भी
क्यों बिस्तर पर आराम नहीं मिलता

मिलते हैं बहुत-से मंज़र लेकिन
कहीं अपना वो मकाम नहीं मिलता

हम कहाँ जा रहे हैं, मालूम नहीं
स्टेशन का कोई नाम नहीं मिलता

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