जीवन जीने का हुनर

जीवन जीने का हुनर कोई नित बताने को आता है
एक मसीहा हर एक को इंसान बनाने आता है

हम जहाँ रहते हैं वो एक सय्यादों की बस्ती है
शिकार दरिंदा करने को, जाल बिछाने आता है

ये दुनिया जालिम बड़ी है, उसपे ऐतवार न कर
उसकी जानिब झुकती है, जिसको झुकाने आता है

कुछ थोड़े से लोग यहाँ, जिनसे दुनिया कायम है
दिल की सारी दौलत जो हम पर लुटाने आता है

किताबों की बातें अक्सर जीवन में झूठी लगती हैं
वो शिक्षक भी झूठा है जो रोज पढाने आता है

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