एक नन्ही बच्ची

एक नन्ही बच्ची जो खेलती थी बाग में
झूमती थी वो कभी बासंती राग में

सपने सँजोये थे बहुत बाबुल ब्याह के
निकल गये प्राण दहेज के फिराक में

समाज का क़ानून क्या करेगा विवाह में
जलती रहेंगी बेटियाँ नरक की आग में

आत्मदाह जब कोई लड़की करती है
निकालते हैं दामन में नुक्स दाग के

मिले न कभी प्यार से पिया ससुराल में
राख मिल गयी मगर सीधे प्रयाग में

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