इश्क़ न होता, फिर क्या होता

 

इश्क़ न होता, फिर क्या होता
इतना कभी न तड़पा होता

बचके निकला हूँ मयखाने से
ज़रा पी लेता तो क्या होता

ये तो नहीं कि इस दुनिया में
मैं शराबी पहला होता

अच्छा होता कि बहक जाता
दिल किसी का बहला होता

लत पीने की, लग जाती अगर
ज़ाम थोड़ा भी छलका होता

डूब जाता दरिया में सनम
साहिल पे मेला लगा होता

सबब क्या है ये पूछते सभी
फिर तेरा ज़वाब क्या होता

सबको मालूम है हाल-ए-इश्क़
सब न करते अगर नफ़ा होता

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