सज गयी दीपों की माला

हृदय में अरमान लिये
होठों पर मुस्कान लिये
मन के आँगन में उतर रही
सज-धजकर सुमुखि-बाला
सज गयी दीपों की माला

आती थीं यादें जिसकी
देखी एक झलक उसकी
रजनी ने तारों का घूँघट
चन्द्रमुखि के मुख पर डाला
सज गयी दीपों की माला

साँझ पूजा-गृह में आयी
अर्चना के धूप-दीप जलायी
भक्ति की स्वरलिपि में दी
गूँथ गीतों की वरमाला
सज गयी दीपों की माला

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