यादों का अलाव जलाया

धीरे-धीरे सर्द रात हुई
धीरे-धीरे शर्म आप हुई
फिर आपस में बात हुई
धीरे मैंने हाथ बढ़ाया
यादों का अलाव जलाया

एक लहर उठी, गिर गयी
सब उत्ताल-तरंगे थिर हुईं
कभी बात न वैसी फिर हुई
फिर न कोई ख्याल आया
यादों का अलाव जलाया

एक चिंगारी पास तुम्हारे
एक चिंगारी पास हमारे
जिस काल के किया हवाले
हमारा उसने गाँव जलाया
यादों का अलाव जलाया

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