हाय, विकल मेरे प्राण हुए

मंजिल न मिली, सपने टूटे
जैसे अंबर से तारे टूटे
पथ छुटा, साथी भी छूटे
प्रिये ! सब अपने अनजान हुए
हाय, विकल मेरे प्राण हुए

तुम हँस दो, सुर सजा लूँगा
तुम पुकारो, पथ बना लूँगा
तुम रूठो, मैं मना लूँगा
प्रिये ! तुम बिन सब विरान हुए
हाय, विकल मेरे प्राण हुए

बजे मंदिर में घंटे टन-टन
थिरक उठे भावों के कण-कण
प्यार के घुँघरू बोले पल-पल
मैं मीरा, तुम घनश्याम हुए
लवलीन मेरे प्राण हुए

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