क्षणिक मिलन था मेरा-तेरा

अज्ञात से तू आ मिली थी
बाती से तेरी लौ लगी थी
ज्योत प्रेम की तब जली थी
शेष न था कुछ तेरा-मेरा
क्षणिक मिलन था मेरा-तेरा

क्षणभंगुर जीवन में क्षणभर
अनंत के प्रवाह में बहकर
विदा हुए चुपके से कहकर
होगा मिलन फिर तेरा-मेरा
क्षणिक मिलन था मेरा-तेरा

हम एक प्रवाह दो धार बहे
प्रेम जीवन के आधार रहे
मिलन अद्वैत के द्वार बने
उसपार न था कुछ तेरा-मेरा
क्षणिक मिलन था मेरा-तेरा

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