प्यार है जीवन का सहारा

बचपन खेल-खेल में बीते
कभी मेल-अमल में बीते
जीवन के मधु-रस को पीते
बीत गया पल-पल हमारा
प्यार है जीवन का सहारा

प्रिये ! उत्कर्ष का न माथ छूटे
कभी हाथों से न हाथ छूटे
साथी, उम्रभर न साथ छूटे
छूट जाये बंधु-बांधव सारा
प्यार है जीवन का सहारा

जोड़ लिया तुमसे जब नाता
जग के डर से कौन घबराता
रथ किरणों का, आता-जाता
रथी, छूटे न रास तुम्हारा
प्यार है जीवन का सहारा

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