आज साथ मेरी तन्हाई है

चाँद निकला, तारे निकले
कुछ अपने पराये निकले
जीने के सौ बहाने निकले
किस्मत का तारा हरजाई है
आज साथ मेरी तन्हाई है

थे अंजान एक-दूजे से खुले
पवन के झूलों में हम झुले
प्रथम-दिन भुला सका न भूले
ऐसी प्रीत-लड़ी बनायी है
आज साथ मेरी तन्हाई है

सभा लगी, मन सोच रहा था
दृग चतुर्दिक विलोक रहा था
बेचैन हृदय से खोज रहा था
देखा, पीछे मेरी परछाई है
आज साथ मेरी तन्हाई है

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