साथी, चलना सीख अकेला

मिट्टी का दीया, रूई की बाती
क्षणभर ज्योति जगमगाती
हस्ती यहाँ किसकी रह जाती
वक्त ने हर शख्स से खेला
साथी, चलना सीख अकेला

पथ में कोई मिल जाये तो
संग तेरे चलना चाहे तो
हँसना, रो लेना चाहे तो
कहना साथी, “मैं अलबेला”
साथी, चलना सीख अकेला

आज मिले, कल खो जायेंगे
गुम कुहरे में हो जायेंगे
दो पथ मंज़िल के हो जायेंगे
“चलो, कहेगी आयी बेला”
साथी, चलना सीख अकेला

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