आस-पास ही हेर रहा हूँ

 

जो पाया था, उसको खोया
खोकर मैं जी-भर कर रोया
सपने जिसके था सँजोया
माला उसकी फेर रहा हूँ
आस-पास ही हेर रहा हूँ

यहीं-कहीं पर खोया होगा
भाग्य-सितारा सोया होगा
वह भी कितना रोया होगा
संग जिसके कुछ देर रहा हूँ
आस-पास ही हेर रहा हूँ

वो मेरी अनमोल-निधि थी
मेरी साधना औ’ सिद्धि थी
टूट गयीं लड़ियाँ प्रीति की
तब से अश्रु बिखेर रहा हूँ
आस-पास ही हेर रहा हूँ

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