जन्मदिन

तुम्हें…उजाले में लाने के लिए
मुझे तुम्हारे अँधेरे में प्रवेश करना होगा
चाहे जैसे भी हो ।

मैंने पुरानी अधजली मोमबत्तियाँ इकट्ठी कर रखी हैं
जिन्हें तुम अपने जन्मदिन के अवसर पर
फूँककर बुझा दिया करते थे
और मैं तालियाँ बजाने के बजाय
पसरती हुई लौ को समेट लिया करता था ।

मैंने छिप-छिपकर तुम्हें प्यार किया है
लेकिन, तुम्हारे प्यार को कभी चुराया नहीं
क्या करूँ…वह सब कुछ तो दे न सका
जो एक धनाढ्य-पिता अपने बच्चों को देते हैं
पर तुम्हारे सपनों को पूरा करने के लिए
अपने लहू को मोम कर दिया
और तुम्हें फूँकने की इज़ाज़त दे दी
तुम मेरे हृदय को…अपने दोस्तों में बाँटते रहे
मैंने तुम्हें बेहद प्यार किया है ।

तुम मेरे जीवन का पहला अनमोल-गुलदस्ता हो
जिसका स्पर्श तुम्हें जब अपनी गोद में पहली बार लिया था
आज भी
उसका एहसास ताज़ा है…जिसके सहारे
मैं तुम्हारे अँधेरे में प्रवेश करूँगा…मैं जानता हूँ
तुम तैयार किए गए अँधेरे में फँस चुके हो
खौफ़नाक चेहरे…उभरते होंगे तुम्हारे इर्द-गिर्द
लेकिन, तुम फिक्र न करो…तुम्हें उजाले में लाने के लिए
मैं उन सारी मोमबत्तियों को…एक साथ
जला दूँगा ।
नोट : “उत्तरपूर्वा” से साभार

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