धंधा ही यहाँ धंधा है

ग़ज़ल….

धंधा ही यहाँ धंधा है
अज़ीब दुनिया का धंधा है
सीख सका न कोई धंधा
हर धंधा इतना गन्दा है
जो था धंधा छोड़ दिया
अब भूखे मरने का धंधा है
दैरो-हरम में जाकर देखा
वहाँ भी चलता धंधा है
ईश्वर को हम भूल गये
कण-कण में दिखता धंधा है
नेताओं का हाथ जोड़कर
वोट माँगना धंधा है
शिक्षा का अभियान चलाकर
स्कूल खोलना धंधा है
एक नंबर के धंधे में
दो नंबर का धंधा है
ऐ खुदा, तेरे बंदे का
चलता-फिरता धंधा है
फक्र से मैं भी कहता हूँ
मेरा भी अपना धंधा है
गीतों को बाज़ार में लाया
सोचा, अच्छा धंधा है

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