पहले ये मालूम न था

नज़्म….

पहले ये मालूम न था, अब मुझको ऐसा लगता है
मेरे दिल को जैसे कोई अपने दिल में रखता है

ये मत पूछो यारों मुझसे इश्क मै किससे करता हूँ
जिसके दिल में रहता हूँ मैं इश्क उसी से करता हूँ
उसके दिल की धडकन से दिल मेरा धड़कता है
पहले ये मालूम न था, अब मुझको ऐसा लगता है

मोहब्बत के परिंदों को उड़ने से मत रोको
इस डाली से उस डाली तक जाने से मत रोको
आज़ाद रहे ये पंछी मुझको हरदम ऐसा लगता है
पहले ये मालूम न था, अब मुझको ऐसा लगता है

बात न जाने मेरे दिल में कब से यारों दबी रही
बनते-बनते बन जायेगी, बात अभी तक नहीं बनी
हो जायेगा संगम एक दिन ऐसा मुझको लगता है
पहले ये मालूम न था, अब मुझको ऐसा लगता है

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