अल्मिया / फ़राज़

अल्मिया[1]

किस तमन्ना [2]से ये चाहा था कि इक रोज़ तुझे
साथ अपने लिए उस शहर को जाऊँगा जिसे
मुझको छोड़े हुए,भूले हुए इक उम्र[3]हुई

हाय वो शहर कि जो मेरा वतन है फिर भी
उसकी मानूस[4]फ़ज़ाओं [5]से रहा बेग़ाना[6]
मेरा दिल मेरे ख़्यालों[7]की तरह दीवाना[8]

आज हालात का ये तंज़े-जिगरसोज़ [9]तो देख
तू मिरे शह्र के इक हुजल-ए-ज़र्रीं[10] में मकीं[11]
और मैं परदेस में जाँदाद-ए-यक-नाने-जवीं[12]
शब्दार्थ:

  1. ↑ त्रासदी
  2. ↑ कामना,दिल की गहराइयों से
  3. ↑ लंबा समय
  4. ↑ परिचित
  5. ↑ हवाओं (वातावरण)
  6. ↑ अंजान
  7. ↑ विचारों
  8. ↑ पागल
  9. ↑ सीने को छलनी कर देने वाला उलाहना
  10. ↑ सोने (स्वर्ण) की सेज
  11. ↑ निवासी
  12. ↑ जौ की एक रोटी को तरसता

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