तुझे देखकर देखना आ गया

ग़ज़ल…

तुझे देखकर देखना आ गया
मेरे रू-ब-रू आईना आ गया

सोचा न था अपनी बाबत कभी
धीरे-धीरे अब सँवरना आ गया

खुद-ब-खुद हम संभलने लगे
ज्यूँ इश्क हमारे दरमियाँ आ गया

लडखडाये जब कभी मेरे कदम
सामने तेरा चेहरा आ गया

जिंदगी और भी निखरने लगी
खुदा की कसम, मज़ा आ गया

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