तू ही धूप-छाँव करता

 

यदि नैन से न नैन मिलते
पुन-स्रोत प्यार का न मिलते
मंज़िल से ऋजु पथ न मिलते
तो क्यों बटोही राह चलता
तू ही धूप-छाँव करता

मिलन की कामना न होती
विरह की संभावना न होती
दिन न होता, रात न होती
फिर कौन यहाँ प्रवाह करता
तू ही धूप-छाँव करता

तू पास भी है, दूर भी है
तू प्यास भी है, बूंद भी है
तू स्थूल भी है, सूक्ष्म भी है
वर्ना, कौन तेरी चाह करता
तू ही धूप-छाँव करता

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