सागर की ओर बहना है

 

दर्द है द्वार प्रीत का
सरगम है आधार गीत का
गाना है प्यार मीत का
शेष यहाँ सब छलना है
सागर की ओर बहना है

बीज मिटकर तरुवर होता
प्रेम मिटकर ईश्वर होता
उसका ही कंठ मधुर होता
जिसका हृदय झरना है
सागर की ओर बहना है

हँस-हँसकर रोना होगा
सब पाकर भी खोना होगा
नियति में जो होना होगा
उसकी कसक भर सहना है
सागर की ओर बहना है

Leave a Reply