विरह, मिलन का संगीत है

 

प्रीत की है रीत निराली
पहले पहल लगती सोनाली
फिर छाती घटा घोर काली
दिन लगता जैसे निशीथ है
विरह, मिलन का संगीत है

प्रीत विरह-मिलन का मौसम
ज्यों पतझड़, बहार का मौसम
दे रहा है सन्देश मौसम
यह प्रवाह प्रिये, नवनीत है
विरह, मिलन का संगीत है

मिलने से तो सुख होता है
न मिलने पर दुःख होता है
मन से ही सुख-दुःख होता है
प्रीत तो अद्वैत का गीत है
विरह, मिलन का संगीत है

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