अपनी ख़ता न कोई गुनहगार हम नहीं SALIM RAZA REWA –

GAZAL
अपनी ख़ता न कोई गुनहगार हम नहीं
फिर क्यूँ तेरी नज़र में तेराप्यार हम नहीं

उनकी किसी भी बात से बेज़ार हम नहीं
खुद बेवफ़ा कहे की वफ़ादार हम नहीं

दिल तोड़ के जाते हो चले जाओ शौक़ से
लो अब तुम्हारी राह की दीवार हम नहीं

करते है बड़ी शान से फ़ाको में गुज़ारा
मुफलिश ही सही देश के गद्दार हम नहीं

इलज़ाम हम पे कुछ भी लगाए ये ज़माना
तेरी क़सम ऐ दोस्त गुनाहगार हम नहीं

हम हौसलों से अपने बनाते है मुक़द्दर
क़िस्मत कि लकीरों के तलबगार हम नहीं

सजदे पे सर झुका के खुदा से की इल्तजा
मौला तेरे करम  का  भी हक़दार हम नहीं

हम जिनपे जान देने को तैयार थे ”रज़ा”
अब तो उन्ही के प्यार के हक़दार हम नहीं

981728122
18/06/2012 posted 01/07/12