शेर ५- असर लखनवी

(1)
ख्वाब बुनिए, खूब बुनिए, मगर इतना सोचिए,
इसमें है ताना ही ताना, या कहीं बाना भी है।

(2)
गम नहीं तो लज्जते1-शादी2 नहीं,
बेअसीरी3 लुत्फे – आजादी नहीं।

(3)
गुलशन में जब कोई जा-ए-अमाँ 4न हो,
फिर क्यों बहार अपनी नजर में खिजाँ5 न हो।

(4)
हम कैद से रिहा हुए भी तो क्या हुआ,
जब गोशा-ए-चमन6 में नसीब आशियाँ न हो।

(5)
गुलों की गोद में जैसे नसीम7 आकर मचल जाए,
उसी अंदाज से उन पुरखुमार8 आंखों में ख्वाब आया।

1.लज्जत – (i) स्वाद, मजा (ii) आनन्द, लुत्फ 2.शादी – हर्ष, आनन्द 3.बेअसीरी – बिना कैद 4.जा-ए-अमाँ- वह स्थान जहाँ शान्ति या सुकून मिल सके 5. खिजाँ- पतझड़ 6. गोशा-ए-चमन – बाग का एक कोना 7. नसीम – ठंडी और धीमी हवा 8.पुरखुमार – नशे में चूर, मस्त

Leave a Reply