शेर ३-असर लखनवी

(1)
उस घड़ी देखो उसका आलम1,
नींद में जब हो आंख भारी।

(2)
कभी मौत कहती है अलहजर2, कभी दर्द कहता है रहम3 कर,
मैं वह राह चलता हूँ पुरखतर4 कि जहाँ फना5 का गुजर नहीं।

(3)
किससे कहिए और क्या कहिए, सुनने वाला कोई नहीं,
कुछ घुट-घुट कर देख लिया, अब शोर मचाकर देखेंगे।

(4)
किसी के काम न जो आए वह आदमी क्या है,
जो अपनी ही फिक्र में गुजरे, वह जिन्दगी क्या है?

(5)
कुछ दिन की और कश्मकशे6-जीस्त7 है ‘असर’,
अच्छी बुरी गुजरनी थी, जैसी गुजर गई।

1. आलम – स्थिति, दशा, हालत 2.अलहजर – बस करो, बचाओ 3. रहम – दया, कृपा, मेहरबानी, इनायत 4.पुरखतर – भीषण, भयानक, अत्यन्त खतनराक 5. फना – (i) मृत्यु, मौत (ii) विनाश, बर्बादी 6.कश्मकश – (i) खींचातानी, आपाधापी (ii) संघर्ष, लड़ाई (iii) दौड़धूप, पराक्रम 7. जीस्त – जिन्दगी

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