पलक का ये इशारा है इन आँखों में आब न देखूँ

पलक का ये इशारा है इन आँखों में आब न देखूँ

के आँखों से तो सब देखूँ मगर कोई ख्वाब न देखूँ

निगाह-ए-शौक को तन्हा करूँ जो अब न तुम्हे देखूँ

कभी छत पर ही आ जाओ तो फिर माहताब न देखूँ

– संजीव आर्या

Leave a Reply