आगमन

बहुत बरसों बाद

अचानक जब हम आएँगे अपने घर
किस तरह होगा हमारा स्वागत ?

क्या हमारे आगमन पर
लोगों के मुँह से चीख निकल जाएगी खुशी की
या हालचाल पूछने को
लोग काम छोड़ कर दौड़ पड़ेंगे !

क्या आँसुओं से भर उठेंगी घर-भर की आँखें
आर्द्र आवाज में हो सकता है कोई पूछे बार बार
इतने बरस तुम कहाँ रहे बेटा ?

घर के दालान में बहुत बड़े हो गए होंगे पेड़
कबड्डी खेलने की जगह बन गए होंगे गुसलखाने
हो सकता है बहुत से ऐसे सवाल भी
पूछे जाएँ जिनका जवाब मुझसे न बन पड़े

दिन बीतते जाएँगे एक के बाद एक
धीरे-धीरे बेजान पड़ने लगेगी आत्मीयता की गर्मी
रसोईघर में फिर से उबलने लगेगी पालक-दाल

हो सकता है एकाएक हम चले जाएँ घर से तब
और बरसों तक खबर ही न लगे किसी को घर में

पर अचानक जब भी लौट कर आएँगे हम अपने घर
किस तरह होगा हमारा स्वागत
बहुत बरसों बाद ?

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