क्यों कि यह समय जैसा ही कुछ हो सकता है

कौन गा रहा है यह मेरे भीतर ?
कौन रो रहा है निःशब्द ?
घिरती है शाम।
पेडों के जिस्म उदासी में हिलते हैं।
एक धूमिल होते हुए अक्स की तरह पिघलता हूं मैं चुपचाप।
मित्रो, अब मुझे सोना है।
अनंत नींद की घाटी से आती अपने नाम की आवाज अगर
कोई सपना नहीं है तो मैं सुन रहा हूं रोज मृत्यु की पदचापें।

आहटें आखिर पत्थर तो नहीं है।

दिन फिर आएंगे: कल के तमाम उलाहनों को ले कर।
भूलने लगेंगे हम नाम। चेहरों का भूगोल।
फिर तुम पूछोगे- हां, कहां था मैं किस्से की शुरुआत में ?
कभी भी खत्म नहीं होती कथा, अगर वह प्रेम से शुरू होती है।

चेहरे ढंक लेते हैं अतीत और स्मृति की छायाएं पिघलती हैं।
फूल। रोशनियां। धूप। सन्नाटे। प्रतीक्षाएं ।
और रात की घंटियां घुल जाते हैं एक सख्त अफसोस के जबड़ों में।
जो गया, वह क्या था ? जो है, वह क्या है ? आ रहा है जो, वह कैसा होगा?

मैं अकेला कहां चला जाता हूं अपने आप को छोड़ कर ?
इस तरह भूल जाना अपना चेहरा
और एक अच्छा आदमी बने रहने के तमाम त्रासद संकल्पों से उपजी
बेबात मुस्कुराहट में खो देना अपने नाम को बार-बार।
हिलते हुए दिन का आखिरी सिरा गीले कपड़े की तरह निचुडता है।

पानी गिरने की आवाज से याद आते हैं कुछ वाक्य।
जहां भी है रोशनी की याददाश्त है।
एक भीगा हुआ संस्मरण अ©र ठिठुरे हुए कुछ पुराने बहाने।
उलाहनों के चिथड़े।
अकेले तय किए गए सफर।
तुम किस शैली में जीवित हो इन पानियों के पार ?

नदियों से बहा कर लाई जाती सिकी हुई रेत
और जंगली बेलों पर खिलते बैंगनी फूलों की तरह ?
जड़ों ने नमी की सारी चिठ्ठियां उस जगह तक पहुंचा दी होंगी
जहां पकते हुए रसीले फलों की याद में
किसी भी क्षण वे अचानक जाग जाएंगी।
वे किस किस से पूछेंगी अपनी देह का पता अ©र कौन सा घर बसाएंगी ?

होता जा रहा है संसार और अकेला। प्रतिदिन।
चीजें गिरती है रोशनी से अंधकार में और लोग सब्र में चुप रहना सीखते हैं ।

चीलें। तनाव। रचाव। देह। धूल। रूखापन। मौका। धोखे। संस्मरण। एकांत।
चुम्बन। चिडि़या। रंग। कम्पन। रहस्य। व्याकुलता। शोक। अधूरापन।
थकान। कामना। इन्तजार। घर। पेड़। वापसी। चांद। व्यस्तता।
दोस्ती। कोहरा। दुपहर। सम्बन्ध। नींद। तृप्ति। निश्चय। वायदे। पीड़ा।
उलझनें। धूप। चिðियां। पहाड़। लुका-छिपी। अफसोस। टूटना।
दूरियां। भागमभाग। किताबें। हाथ। खिड़की। इतिहास।
बेबसी। पंख। गर्द। मौसम। सेब। अक्षर। पुल। अकेलापन।

मेरा एक हमशक्ल ढूंढता
इन में

जाने
कब
से
किसे ?

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  1. Gurpreet Singh 05/12/2015

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