यज्ञ-प्रश्न

घर लौट कर
देखता हूँ
बदला हुआ नक्शा
बिखरे हुए खिलौने
जमा दिये हैं किसी ने
नल टपक रहा है
रोशनियाँ ग़ायब
और
सन्नाटा
निस्तब्ध फ़र्श पर
गिरा है अभी-अभी
चिडि़या का नन्हा-सा
एक भूरा पंख
ज़रूर कोई रहता होगा
यहाँ पिछले जन्म में
चाहता हूँ
बार-बार जानना
मेरा वह हमशक्ल आखि़र
कौन है ?

कौन हैं आप ?
पूछता हूँ

गूँजता प्रतिप्रश्न
आप कौन हैं ? कौन हैं ?
प्रश्नकत्र्ता, घर और मैं
अनेक जन्मों से
तीनों मौन हैं।

One Response

  1. Janak 25/06/2012

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