चीटियाँ

चीटियाँ मृत्यु तक सर्वशक्तिमान हैं
भूमि पर स्थित हर चीज़ तक उनकी पहुँच है

वे जानती हैं मनुष्य की क्षुद्र और नश्वर दुनिया के बहुत से तथ्य
अपनी सूक्ष्म नाकों से भी वे सूँघ सकती हैं चीनी और चावल के दानों की उपस्थिति
हर बार सुराग लग ही जाता है उन्हें मेज़ के नीचे फैले अन्न-कणों का
हर बार मालूम होता है वहाँ से चीटियों को अपने घर का सबसे छोटा रास्ता
वे व्यस्ततापूर्वक उस पर चल पड़ती हैं और कभी पलट कर नहीं देखती

न वे प्रतीक्षा करती हैं न पूछताछ
वे कभी नहीं देखतीं अपना भविष्यफल पत्र-पत्रिकाओं में
सफ़र कर निकलने के लिए उन्हें नहीं ज़माना पड़ता हजामत का सामान
उन्हें अपने साहसिक अभियानों की ख़बर अख़बारों में छपवाने में भी कोई दिलचस्पी नहीं होती
चीटियों के जीवन पर बनायी जाती हैं फि़ल्में
दिये जाते हैं विज्ञानसम्मत भाषण
उन पर लिखे जाते हैं दिलचस्प नाटक
पर वे कभी उन्हें देखनी नहीं आतीं

उन्हें पता होती है यह बात जून के बाद आता है जुलाई
तब उन्हें साँस लेने तक की फुरसत नहीं मिलती
बरसात की ऋतु से पहले ही अपने बच्चों के लिए अटा देती हैं वे बिलों को राशन से
अपने से कई गुना मज़बूत और बड़ी चीजों को अत्यधिक छोटे मुँहों से
गन्तव्य तक खींच कर ले आने की कला में निष्णात होने के बावजूद
वे गर्व में भर कर फूले नहीं जातीं और पुरानी शक्लों में ही बनी रहती हैं

हवाई जहाज़ों की खिड़कियों से बेशक चीटियाँ दिखलायी नहीं देतीं
पर उस वक्त भी वे पूरी पृथ्वी पर फैली होती हैं नन्हें अन्न कणों की तरह
और सबसे बड़ी बात तो यह कि चीटियों को अपनी
पूरी प्रगतिशीलता और काव्यात्मकता के बावजूद
कभी कवि होने की ग़लतफ़हमी नहीं होती

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