स्त्री

स्त्री
(ब्राज़ील के कवि म्यूरिलो मैंडस की रचना ‘अधचिडि़या’ पढ़ कर)

अंतरिक्ष के आखिरी छोर पर खड़ी एक स्त्री
पक्षियों को पंख
पेट को अन्न आँखों को दृश्य
कवियों को बिम्ब देती है

उसकी सार्वभौमिक उदारता में
उत्ताल समुद्र नतमस्तक हो जाते हैं
पृथ्वी की चंचल और भंगुर वनस्पतियाँ
उसके सत्कार में कोमल दूब की आकृति धारण कर
धरती पर लेट जाना चाहती हैं
कविता के लिए भाषा आलोक की तरह आसमान से उतरती है
फिर वह कविता ख़त्म हो जाने तक समुद्र दूब और पक्षियों के साथ
उसके अंतरिक्ष से पृथ्वी पर आविर्भूत होने की निष्फल प्रतीक्षा करती है

सन् 1968 ई॰ से मैं
उस स्त्री का ऋणी हूँ

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